रायबरेली : रमजान के पवित्र माह में रोजा रखने के बाद ईद का त्योहार शुक्रवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। गुरुवार को इसका असर बाजार में भी देखने को मिला। सुबह से ही खरीदारी के लिए लोग उमड़ पड़े। इससे दुकानदारों के मुरझाए चेहरे खिल गए। वहीं, घरों में बुजुर्गों, युवाओं, महिलाओं सहित बच्चों में उल्लास का माहौल है। कोरोना महामारी को देखते हुए शहर काजी समेत मौलवियों द्वारा लॉकडाउन के गाइडलाइन का पालन करने और घर से ही नमाज अदा करने की अपील की गई। सब्जी मंडी, कैपरगंज, सुपर मार्केट में सुबह के चार घंटे भीड़ उमड़ी रही। महिलाओं के साथ पुरुषों ने जरूरत की सामग्री खरीदी। वहीं मुस्लिम महिलाओं और युवतियों ने सजने-संवरने के लिए नए-नए सौंदर्य सामग्री खरीदी। इससे बाजारों में मेले जैसा माहौल रहा। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से आवश्यक सेवाओं को छूट दी गई है। सुबह सात से 11 बजे तक फल, सब्जी व खाद्य पदार्थ की दुकानें खुली रहती हैं। लोगों ने अपने-अपने जरूरत के हिसाब से सामान की खरीदारी की। वहीं, सेवई की खूब बिक्री हुई। मुस्ताक का कहना है कि बाजार में तीन से चार तरह की सेवई उपलब्ध हैं। इनमें लच्छेदार सेवई, लंबी सेवई की मांग सबसे अधिक है।
रायबरेली : तहसील मुख्यालय से ज्यादा दूर नहीं है नरेंद्रपुर गांव। यहां एक माह के भीतर 25 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें से दो लोग कोरोना संक्रमित थे। बाकी सर्दी, जुकाम और बुखार से पीड़ित थे। डीएम के अर्दली भी इसी गांव के थे, जिन्हें महामारी ने निगल लिया। यहां के हालात ये हैं कि चिकित्सा और स्वच्छता के लिए एक बार भी गांव में कोई झांकने तक नहीं आया। सुबह करीब 11 बजे ही गांव में सन्नाटा पसरा मिला। दुकानों पर छिटपुट लोग नजर आए। गांव के अनिल कुमार ने बताया कि पंचायत चुनाव के बाद एकाएक यहां मौतों का सिलसिला चल पड़ा। उम्रदराज लोगों की जान गई तो यही सोचा गया कि उनका समय पूरा हो गया होगा, मगर जब जवान और हष्ट-पुष्ट लोग काल कवलित होने लगे तो गांव में भय का माहौल व्याप्त हो गया। अब तो सर्दी, जुकाम होते ही काढ़ा और गर्म पानी का सेवन शुरू कर दिया जाता है। मेडिकल स्टोर से दवाइयां ले ली जाती हैं। यहीं के योगेंद्र शुक्ल ने बताया कि एक मास्टर साहब चुनाव ड्यूटी करने के बाद लौटे और बीमार पड़ गए। सही इलाज न मिलने के कारण अब वे हमारे बीच नहीं हैं। पहले कभी गांव में इतनी संख्या में लोगों की जान नहीं गई, जितनी की इस बार। रमेश कुमार ने बताया कि गांव में अभी भी करीब 50 लोग बुखार, खांसी से पीड़ित हैं। ग्रामीण कंजी के पत्ते, गिलोय का सेवन कर स्वयं को ठीक कर रहे हैं। बुखार अधिक आने पर चौदहमील स्थित मेडिकल स्टोर से दवा लाई जाती है। कोरोना जांच और इलाज तो छोड़िए, गांव में अब तक कोई हाल जानने तक नहीं आया।
रायबरेली : जिले में बुधवार की देर शाम आंधी के साथ आई बारिश से बिजली आपूर्ति व्यवस्था धड़ाम हो गई। शहर तो आधी रात तक अंधेरे में डूबा ही रहा। ग्रामीणअंचल के हालात तो और भी बदतर थे। कई गांवों में गुरुवार की दोपहर तक बिजली का संकट लोगों ने झेला। पॉवर कारपोरेशन के अफसर कितने भी दावे करें कि आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त है, लेकिन हकीकत इससे बहुत अलग है। हल्की बारिश हो जाए या हवा का मामूली झोंका ही क्यों न आ जाए, यहां लाइनें ध्वस्त हो जाती हैं। महकमे के जिम्मेदार हर चीज से अच्छी तरह वाकिफ है, इसके बाद भी सिर्फ हवा हवाई दावों के सहारे काम चलाया जा रहा है। इसी का दंश बीती रात शहर की तीन लाख आबादी समेत लाखों ग्रामीणों ने झेला। हाल यह था कि बूंदाबांदी के साथ ही शहर के इंदिरा नगर, प्रगतिपुरम समेत अन्य सभी बिजली उपकेंद्रों की 33 केवी लाइनें जवाब दे गई थीं। हाइटेंशन लाइनों के साथ लो-टेंशन लाइनों का भी हाल बेहाल था। कहीं जंफर कटे थे तो कहीं खंभा टूट गया। आधी रात तक लोग बिजली का इंतजार करते रहे। आपूर्ति व्यवस्था की इस बदहाली को लेकर कनेक्शनधारकों में विभाग के खिलाफ कड़ी नाराजगी व्याप्त है।